स्काउट घोटाले की गूंज तेज, राज्य स्तर पर जांच कमेटी गठित

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मुंगेली। जिले में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों, ज्ञापनों और मीडिया में प्रकाशित खबरों के बाद राज्य स्तर पर जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। राज्य मुख्य आयुक्त इंद्रजीत सिंह खालसा ने 10 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, बीते एक माह से विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा जिला एवं राज्य स्तर पर शिकायतें प्रस्तुत कर स्काउट के जिला संगठन आयुक्त पर लाखों रुपए के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया जा रहा था। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई जा रही थी। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए राज्य मुख्यालय ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच समिति का गठन किया।

13 अप्रैल को होगी अहम पेशी
जांच प्रक्रिया के तहत पूर्व जिला संगठन आयुक्त मोरध्वज सप्रे और वर्तमान जिला सचिव मोनू बेलदार को 13 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित राज्य मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, पहली बैठक में ही मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी।

पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच
गठित समिति में अशोक कुमार देशमुख को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अमित कुमार, पूनम सिंह साहू, जलवती साहू और संतोष कुमार साहू को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह टीम पूरे मामले की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को सौंपेगी।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि पूर्व जिला संगठन आयुक्त मोरध्वज सप्रे के विरुद्ध मई 2025 में 17 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया था। वित्तीय अनियमितताओं सहित विभिन्न आरोपों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के चलते 4 जुलाई 2025 को उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया था। साथ ही मामले की जांच कर दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, जांच पड़ी थी ठंडी
बर्खास्तगी के बाद सप्रे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें राज्य मुख्य आयुक्त सहित जिला स्तर के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया। न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण जांच की गति धीमी पड़ गई थी। हालांकि हाल ही में सप्रे द्वारा बहाली के लिए पुनः आवेदन देने और अधिकारियों पर आरोप लगाने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

एफआईआर की मांग ने बढ़ाया दबाव
इसी बीच विभिन्न जनसेवी संगठनों द्वारा सप्रे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे गए। साथ ही यह चर्चाएं भी सामने आने लगीं कि राज्य स्तर पर उनकी बहाली की तैयारी की जा रही है, जिससे मामला और गर्मा गया।

अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर
राज्य स्तर पर पुनः जांच कमेटी के गठन के बाद पूरे मामले में नई हलचल पैदा हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच समिति अपने निष्कर्ष में आरोपों की पुष्टि करती है या पूर्व अधिकारी को राहत मिलती है। फिलहाल, जिले भर में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

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