राज्य सभा में कृषि संबंधी विभिन्न सवालों के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए सकारात्मक जवाब
• ड्राईलैंड से भुखमरी से समृद्धि तक समग्र रूप से कृषि क्षेत्र का विकास कर रही है मोदी सरकार- शिवराज सिंह चौहान
• मराठवाड़ा‑महाराष्ट्र के 23 शुष्क जिलों के लिए 808 जलवायु‑सेंसिटिव किस्मों का बड़ा अभियान- शिवराज सिंह
• ICAR‑CRIDA की तकनीकों से प्रति एकड़ ₹6000 और खेत‑तालाब से ₹73,895 की आय वृद्धि-शिवराज सिंह
• 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्में और 651 जिलों की कृषि आकस्मिक योजनाएँ; संसद में शिवराज सिंह ने दी जानकारी
• पंजाब के किसानों को प्रणाम, पराली प्रबंधन से लेकर मृदा स्वास्थ्य तक नई राह- शिवराज सिंह
• केरल में चुनावी सरगर्मियों के बीच विपक्ष के सवाल पर कृषक हितैषी काम का शिवराज सिंह ने दिया जवाब
• श्री अन्न (मिलेट्स), MSP और ‘लैब से लैंड’ अभियान से किसानों को नया सहारा- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली/इंदौर । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यसभा में शुष्क खेती, जलवायु‑अनुकूल किस्मों, श्री अन्न (मिलेट्स), पंजाब‑महाराष्ट्र जैसे कृषि‑प्रधान राज्यों की चुनौतियों और किसानों की आय बढ़ाने के सवालों पर विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार ड्राईलैंड से लेकर सिंचित क्षेत्रों तक हर किसान के साथ पूरी ताकत से खड़ी है। उन्होंने अपने उत्तरों में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता, जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य, पराली प्रबंधन और एमएसपी‑खरीद जैसे मुद्दों पर सरकार के ठोस कदम गिनाते हुए राजनीतिक हमलों का भी तथ्यों के आधार पर जवाब दिया, और किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
ड्राईलैंड से भुखमरी से समृद्धि तक भारत की ऐतिहासिक छलांग
राज्य सभा में प्रश्नों के उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने याद दिलाया कि एक समय भारत को अपनी जनता की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गेहूँ जैसे मूलभूत खाद्यान्न का भी आयात करना पड़ता था और देश पीएल‑480 योजना के अंतर्गत मिले गेहूँ पर निर्भर था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है, देश के अन्न भंडार भरे हैं और चावल उत्पादन में भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में नंबर एक स्थान पर पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौर में खाद्यान्न उत्पादन तो तेजी से बढ़ा, लेकिन शुष्क (ड्राईलैंड) क्षेत्र अपेक्षाकृत अछूते रह गए थे। अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने देश की लगभग 48 प्रतिशत शुष्क भूमि, जो वर्षा पर निर्भर है, पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके परिणामस्वरूप 2021 में इन ड्राईलैंड और वर्षा‑निर्भर क्षेत्रों में खाद्यान्न उत्पादन में 82 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई और कुल राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत तक हो गया।
मराठवाड़ा‑महाराष्ट्र के 23 शुष्क जिलों के लिए 808 जलवायु‑सेंसिटिव किस्मों का बड़ा अभियान
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र के 23 जिले शुष्क भूमि वाले हैं और 23 जिले वर्षा‑आश्रित हैं, जिनमें छत्रपति संभाजीनगर, जलना, बीड, लातूर, उस्मानाबाद, नांदेड़, परभणी, हिंगोली जैसे मराठवाड़ा के जिले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन इलाकों के लिए विशेष परियोजनाएँ तैयार की गई हैं, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसानों तक निरंतर पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि महाराष्ट्र के लिए 808 उच्च उपज देने वाली जलवायु‑सेंसिटिव फसल किस्में विकसित/चयनित की गई हैं- 332 अनाज, 122 तिलहन, 61 दालें, 198 रेशेदार फसलें, 19 गन्ना और 8 अन्य संभावित फसलों की किस्में, जो विशेष रूप से ड्राईलैंड और वर्षा‑निर्भर खेती के लिए अनुकूल हैं। इन किस्मों के उपयोग से मराठवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
ICAR‑CRIDA की तकनीकों से प्रति एकड़ ₹6000 और खेत‑तालाब से ₹73,895 की आय वृद्धि
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि हैदराबाद स्थित केंद्रीय बरानी/शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR‑CRIDA) बरानी खेती पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएँ चला रहा है, जिनके 18 मुख्य, 1 उप और 9 स्वायत्त केंद्र हैं। इसके अलावा 25 मुख्य और 5 स्वायत्त केंद्र भी देशभर में स्थापित हैं, जिनमें महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि CRIDA द्वारा विकसित तकनीकों के प्रभाव के तृतीय‑पक्ष मूल्यांकन में यह सामने आया कि मौसम आधारित सलाह से किसानों की आय में औसतन 6,000 रुपये प्रति एकड़ की वृद्धि हुई है। खेत‑तालाब, चेक‑डैम, स्टॉप‑डैम, बोरी‑बंधन जैसी जल संरक्षण तकनीकों के कारण प्रति खेत‑तालाब लगभग 73,895 रुपये तक अतिरिक्त आय दर्ज की गई। किसानों को अलग‑अलग सलाह देने के 519 संदेश, लगभग 200 फसल पूर्वानुमान, 58 फील्ड दिवस, 37 किसान मेले और 6,577 फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से इन तकनीकों को खेत स्तर तक पहुँचाया गया।
3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्में और 651 जिलों की कृषि आकस्मिक योजनाएँ
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 10–11 वर्षों में 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्मों का विकास किया है, जो कम पानी, अधिक तापमान और अधिक सर्दी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हैं। इन किस्मों के माध्यम से सूखा, बाढ़, पाला, लू जैसी चरम मौसम स्थितियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक समाधान किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के 651 जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएँ तैयार की गई हैं, जिनमें हीट वेव, कोल्ड वेव, ओलावृष्टि और अन्य अत्यधिक मौसम घटनाओं के प्रबंधन के स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं। साथ ही, राष्ट्रीय मिशन ऑन सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और अन्य माध्यमों के जरिए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने, बरसात सिंचित क्षेत्र विकास, खेत पर जल प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे तीन प्रमुख घटकों पर विशेष बल दिया जा रहा है।
पंजाब में पराली प्रबंधन से लेकर मृदा स्वास्थ्य तक नई राह
पंजाब पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरित क्रांति के दौर से ही पंजाब के किसानों ने अपने परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरे, भुखमरी मिटाने का काम किया और पूरे देश के लिए मिसाल कायम की, जिसके लिए वे पंजाब और पंजाब के किसानों को हृदय से प्रणाम करते हैं।उन्होंने साथ ही यह चिंता भी साझा की कि अत्यधिक उत्पादन के दबाव, अधिक पानी वाली किस्मों और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग के कारण पंजाब सहित कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम तथा सेकेंडरी और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के स्तर में गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने दोहराया कि किसान कभी दोषी नहीं और बताया कि पंजाब के किसान स्वयं पराली प्रबंधन व नई पद्धतियाँ अपनाने में आगे हैं; उन्होंने अपने 27 नवम्बर 2025 के मोगा जिले के दौरे का उल्लेख किया, जहाँ रन सिंह वाला गाँव और आस‑पास के गाँवों में डायरेक्ट सीडेड राइस और ज़ीरो टिलेज जैसी तकनीकों से बिना पराली जलाए खेती का सफल प्रयोग होते देखा गया।
केरल में चुनावी सरगर्मियों के बीच विपक्ष के सवाल पर कृषक हितैषी काम का जवाब
अपने उत्तरों में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने राजनीतिक टिप्पणी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केरल में अभी चुनाव है, इसलिए कुछ न कुछ तो उठाई देना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सवाल श्री अन्न पर था और सरकार उसी पर तथ्यात्मक जवाब दे रही है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए आर्थिक और MSP संबंधी सवालों के जवाब में आंकड़ों के साथ बताया कि श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए 2015 से 2025 के बीच अनेक कदम उठाए गए हैं, जिनमें नई किस्में जारी करना, बीज उत्पादन को प्रोत्साहन, रियायती बीज वितरण और MSP में उल्लेखनीय वृद्धि शामिल है। उन्होंने इस राजनीतिक संदर्भ में भी किसान‑केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का फोकस किसानों को सशक्त करने पर है, चाहे वह पंजाब हो, केरल हो या कोई अन्य राज्य, और सरकार के काम का मूल्यांकन किसानों की आय, उत्पादन और सुरक्षा के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक आरोप‑प्रत्यारोप के आधार पर।
श्री अन्न, MSP और ‘लैब से लैंड’ अभियान से किसानों को नया सहारा
शिवराज सिंह चौहान ने श्री अन्न (मिलेट्स) को भारत की प्राचीन कृषि परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि हमारे संतों और गुरु नानक देव जी तक ने ऐसे श्री अन्न का महत्व रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि श्री अन्न के लिए विशेष मिलेट्स मिशन बनाया गया, जिसका उद्देश्य सिर्फ देश में ही नहीं, विश्व स्तर पर भी इन्हें प्रोत्साहित करना है, ताकि “हित‑भुक्त, मित‑भुक्त और ऋत‑भुक्त” की अवधारणा के अनुरूप स्वास्थ्यवर्धक आहार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन के अंतर्गत श्री अन्न पर उप‑मिशन चलाया जा रहा है; 2015 से 2025 के बीच पंजाब में 45 मिलेट्स किस्में (ज्वार, बाजरा और लिटिल मिलेट) जारी की गई हैं और इन्हें बठिंडा, फाजिल्का, मानसा, मोगा, रूपनगर, संगरूर आदि जिलों में उगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में ज्वार, बाजरा, रागी की MSP में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है और 2024‑25 के दौरान 11 लाख टन से अधिक श्री अन्न की सरकारी खरीद की गई है।
शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में यह किसान हितैषी सरकार है, हम जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं, चाहे ड्राईलैंड में 82% तक उत्पादन वृद्धि हो, 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्मों का विकास हो, या श्री अन्न की रिकॉर्ड खरीदी; हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- किसान मजबूत हो, कृषि टिकाऊ हो और देश आत्मनिर्भर व समृद्ध बने।

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