सायबर अपराधों की रोकथाम एवं विवेचना की गुणवत्ता में सुधार पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

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रिपोर्टर ✒️ रूपचंद रॉय

🔹  गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी नवीन SOP पर हुई विस्तृत चर्चा
🔹 तकनीकी सत्रों के माध्यम से आधुनिक उपकरणों की दी गई जानकारी

बिलासपुर । रामगोपाल गर्ग, पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज द्वारा स्थानीय चेतना हॉल में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए “सायबर अपराधों की रोकथाम एवं विवेचना की गुणवत्ता में सुधार” विषय पर एक दिवसीय रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में रजनेश सिंह (उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर) तथा विजय पाण्डेय (पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक ही पुलिसिंग का भविष्य है और इसमें दक्षता हासिल कर ही पुलिस अपराधियों से एक कदम आगे रह सकती है। उन्होंने साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।

इस अवसर पर रजनेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में विवेचना में तकनीकी ज्ञान का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। वहीं विजय पाण्डेय ने विवेचना के स्तर को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप उन्नत करने पर बल दिया।

कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई—

▪️ नई SOP पर प्रस्तुति:
गगन कुमार द्वारा गृह मंत्रालय, भारत सरकार की जनवरी 2026 में जारी नई SOP के तहत साइबर ठगी में गए पैसों को होल्ड एवं वापस कराने की प्रक्रिया पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।

▪️ नेटग्रिड का उपयोग:
मयंक मिश्रा ने नेटग्रिड के उपयोग एवं इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।

▪️ सायबर फॉरेंसिक:
सायबर विशेषज्ञ आरिफ खान ने साइबर अपराधों की जांच में फॉरेंसिक साक्ष्यों के संकलन की तकनीकी बारीकियां साझा कीं। उन्होंने लाइव डेमो के माध्यम से विभिन्न प्रकार के साइबर फ्रॉड और डार्क नेट की जानकारी दी।

▪️ आधुनिक टूल्स एवं एप्स:
प्रसाद सिन्हा एवं आरक्षक नवीन एक्का द्वारा CDR एनालिसिस, C-Trace, सशक्त एप तथा त्रिनयन जैसे आधुनिक टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। इन तकनीकों के माध्यम से चोरी या गुम वाहनों की पहचान तथा अपराधियों की लोकेशन ट्रेस करने की प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को साझा किया। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने इन समस्याओं का समाधान करते हुए साइबर अपराधों की प्रभावी जांच के लिए मार्गदर्शन दिया। उल्लेखनीय है कि श्री गर्ग स्वयं साइबर एवं तकनीक के विशेषज्ञ हैं और इस क्षेत्र में कई नवाचार कर चुके हैं।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं विवेचकों को नवीनतम साइबर तकनीकों तथा भारत सरकार के दिशा-निर्देशों से अवगत कराना था, ताकि साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आम नागरिकों की राशि सुरक्षित वापस कराई जा सके और अपराधियों तक शीघ्र पहुंचा जा सके।

कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर मधुलिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं साइबर अपराधों की समझ और विवेचना की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कार्यक्रम का संचालन उमाशंकर पाण्डेय द्वारा किया गया।

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