डिजिटल सुविधा केंद्र में अंगूठे के निशान से मिल रही सुविधाएं, 86 वर्षीया भक्तिन राय बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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राजानवागांव में डिजिटल सेवा ने बदली बुजुर्गों की जिंदगी

बैंक की कतारों से मुक्ति, गांव में ही मिल रहा हर लाभ

रिपोर्टर✒️कमलेश सिंह | कवर्धा

उम्र 86 साल। चेहरे पर झुर्रियां, लेकिन आंखों में आत्मनिर्भरता की चमक। ग्राम की भक्तिन राय के लिए डिजिटल तकनीक अब किसी बड़े शहर की चीज नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। जिन पेंशन की रकम के लिए उन्हें कभी बैंक की लंबी कतारों में लगना पड़ता था, आज वही राशि गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र में महज अंगूठे के निशान से मिल जाती है।

करीब 30 वर्ष पहले पति के निधन के बाद भक्तिन राय ने कठिन हालात में जीवन गुजारा। लंबे समय तक पेंशन और सहायता राशि के लिए बैंक के चक्कर काटना उनकी मजबूरी थी। उम्र बढ़ने के साथ यह परेशानी और भी बढ़ती गई। लेकिन गांव में डिजिटल सुविधा केंद्र शुरू होने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। अब उन्हें निराश्रित विधवा पेंशन और महतारी वंदन योजना की राशि नियमित रूप से मिल रही है।

डिजिटल सुविधा केंद्र पर न सिर्फ उन्हें तुरंत नकद राशि मिल जाती है, बल्कि खाते में आई रकम की पूरी जानकारी भी वहीं मिल जाती है। इससे न समय की बर्बादी होती है और न ही दूर जाने की मजबूरी। भक्तिन राय के बेटे और बहू मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। बहू को भी महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे घर के खर्च में मदद मिलती है। इलाज और दवाइयों के लिए मिलने वाली पेंशन की राशि बुजुर्ग भक्तिन राय के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

भक्तिन राय का पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना है, जिससे उन्हें सुरक्षित छत मिली है। वे बताती हैं कि अब गांव में ही अधिकतर काम आसानी से हो जाते हैं। बैंक, दफ्तर या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र के जरिए अब तक करीब 18 लाख रुपए से अधिक का लेनदेन किया जा चुका है। यहां ग्रामीणों को नकद आहरण, फंड ट्रांसफर, जीवन, सामान्य और कृषि बीमा, पेंशन, पैन कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का पंजीयन, बिजली बिल भुगतान, ट्रेन और हवाई टिकट बुकिंग तथा ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं के माध्यम से प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं।

ग्रामीण यहां से दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, महतारी वंदन योजना की राशि निकालने, दूसरे खाते में पैसा भेजने, आवास योजना की स्थिति जानने जैसे कई जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं। डिजिटल सुविधा केंद्र ने खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत दी है।

आज भक्तिन राय जैसी बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह केंद्र केवल सेवा का स्थान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का मजबूत सहारा बन चुका है।

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